About VJV

प्र: 1    विचक्षण जैन विद्यापीठ स्कूल का मुख्य उद्देश्य क्या रहेगा ?

उत्तर    बहिरंग एवं अंतरंग जीवन का संतुलित विकास ही विचक्षण जैन विद्यापीठ स्कूल का मुख्य ध्येय है‚ जिसे हम निम्न प्रकार से समझ सकते हैं –

  • बौद्धिक एवं नैतिक विकास में संतुलन
  • तार्किक एवं भावनात्मक व्यवहार में समन्वय
  • स्वहित एवं समाज हित में संतुलन
  • मूल्यवर्धक शिक्षा
  • आत्मानुशासन का विकास
  • उद्यमी-कौशल का विकास

प्र: 2    शिक्षा की गुणवत्ता का विकास करने के लिए विचक्षण जैन विद्यापीठ स्कूल की नीति क्या रहेगी ?

उत्तर    शिक्षा की गुणवत्ता के विकास हेतु निम्न पहलुओं पर विशेष ध्यान दिया जाएगाः-

  • उत्तम अनुभवी शिक्षकों की व्यवस्था।
  • शिक्षा हेतु आवश्यक सर्व सुविधा युक्त स्कूल एवं हॉस्टल बिल्डींग।
  • आधुनिक तकनीक पर आधारित उपकरणों (Equipments) की सुव्यवस्था। जैसे स्मार्ट क्लासेस‚ कम्प्यूटर लेब‚ GPRS आदि।
  • शिक्षक केन्द्रित शिक्षा के बजाय विद्यार्थी केन्द्रित शिक्षा पर जोर।
  • अभिभावकों के ज्ञान एवं संस्कारों के विकास हेतु सेमिनार‚ शिविर‚ गोष्ठी आदि का आयोजन।।

प्र: 3    सभी स्कूलों में बच्चों के सर्वांगीण विकास की ओर ध्यान दिया जाता है‚ तो ऐसी स्थिति में विचक्षण जैन विद्यापीठ स्कूल की क्या विशेषता रहेगी ?

उत्तर    सभी का लक्ष्य व्यक्तित्व का सर्वांगीण विकास करना है‚ फिर भी सर्वांगीण विकास का मापदंड सबका अलग-अलग है। विचक्षण जैन विद्यापीठ स्कूल-प्रबन्धन की दृष्टि में सर्वांगीण विकास के 6 पहलू हैं‚ जिनका विकास होना अत्यंत आवश्यक है‚ जो इस प्रकार हैंः-

1        शारीरिक विकास अर्थात् शरीर की स्वस्थतास्फूर्ति और श्रमशीलता का विकास।

2        बौद्धिक विकास अर्थात् पुस्तकीय ज्ञान को जाननेग्रहण करने एवं याद रखने की क्षमता का विकास।

3        वाचिक विकास अर्थात् हितमित एवं प्रिय ढंग से बोलने की कला का विकास।

4        मानसिक विकास अर्थात् चिंतनमनन और निर्णय क्षमता का विकास।

5        भावात्मक विकास अर्थात् सकारात्मक भावों (जैसे – धैर्यसहनशीलतानिर्भयता आदि) का विकास तथा नकारात्मक भावों (जैसे – ईर्ष्याअहंकपट आदि) का ह्रास और इस तरह तनाव-मुक्त जीवन जीने की कला का विकास।

6        आध्यात्मिक विकास अर्थात् स्वाध्यायध्यान आदि के द्वारा आत्म जागृति का विकास।

प्र: 4    विचक्षण जैन विद्यापीठ परिसर में कौन-कौनसी गतिविधियाँ संचालित होंगी ?

उत्तर     विचक्षण जैन विद्यापीठ एक बहुआयामी संस्था है‚ जिसमें प्रत्येक उम्र के व्यक्तियों के विकास के लिए उपयोगी गतिविधियाँ संचालित की जाएगी‚ ये इस प्रकार है –

  1. स्कूल विभाग – इसमें आधुनिक उच्चस्तरीय शिक्षा के साथ धार्मिक एवं नैतिक संस्कार भी दिए जाएंगे।
  2. धार्मिक गुरूकुल – इसमें जैनधर्म के आचार-विचार का तलस्पर्शी ज्ञान प्राप्त किया जा सकेगा।
  3. साधना आश्रम – इसमें कोई भी साधक आघ्यात्मिक भक्तिस्वाध्यायध्यान आदि के द्वारा दीर्घकालीन साधना कर सकेंगे।

इस प्रकार भारत वर्ष में शिक्षा‚ सेवा‚ साधना का त्रिवेणी संगम रुप विचक्षण जैन विघापीठ अपने आप में एक अनुठी अनुपम पहल है।

प्र: 5    क्या विचक्षण जैन विद्यापीठ भी एक व्यापारिक संस्था है ?

उत्तर    नहीं ! यह एक गैरलाभकारी (Non Profit Motive) रजिस्टर्ड संस्था  है। इसका मूल उद्देश्य धन कमाना नहीं‚ बल्कि एक अच्छे जीवन के निर्माण में सहयोग प्रदान करना है।

प्र: 6    विचक्षण जैन विद्यापीठ ही क्यों

उत्तर वृक्ष कबहुँ न फल भरवैनदी न संचै नीर।

परमारथ के कारणे‚  साधुन धरा शरीर।।

  1. विचक्षण जैन विद्यापीठ की परिकल्पना जैन साधु-साध्वी भगवंतों की परमार्थ भरी सोच का मूर्तरुप है। जहाँ अर्थ (धन) गौण एवं परमार्थ मुख्य हो‚ आप ऐसी संस्था में क्या अपने बच्चों को नहीं भेजेंगे ?
  2. सिद्ध‚ बुद्ध और मुक्त होने की राह अपनायी है‚ जिनके द्वारा समाज में गिरते हुए संस्कारों एवं नैतिक मूल्यों को सहेजने का बीड़ा उठाया गया है। ऐसी संस्थान का सफल होना निश्चित है। आईये आप भी इस सफलता का हिस्सा बनियैं।
  3. एक दिव्य वातावरण जहाँ कैवल्यधाम तीर्थ में विराजित चौबीस तीर्थंकर परमात्माओं के दर्शन से शांति एवं परमात्म गुणों को विकसित करने की सतत प्रेरणा मिलती रहेगी।
  4. विचक्षण जैन विद्यापीठ में बच्चों को बाल्यकाल से ही निरंतर साधु-साध्वी भगवंतों का सानिध्य प्राप्त होता रहेगा‚ जिससे आने वाली पीढ़ी उच्च संस्कार एवं धर्म का स्वाद चखे‚ जो वर्त्तमान में अभिभावक न स्वयं पा रहे हैं और परिणामतः न बच्चों को दे पा रहे हैं।
  5. सभी कुछ हो रहा है‚ इस तरक्की के जमाने में। मगर क्या गजब है कि‚ आदमी इन्सान नहीं होता।।
  6. यह एक ऐसा प्रयास हैं‚ जिसमें छात्र/छात्रा एक सम्पूर्ण संतुलित इंसान (Complete Human Being) बनकर समाज को मिले।
  7. जहाँ योग्यता का विकास किया जाये‚ न कि सिर्फ ज्ञानी बनाने का विचार हो।
  8. छात्र/छात्रा अपने जन्म एवं जीवन का वास्तविक मूल्य जाने‚ ताकि जब कभी उसे आगे चलकर विपरीत परिस्थितियों का सामना करना पड़े‚ तो Depression, Agression या आत्महत्या जैसी गलत राह न अपनाना पड़े।