परिचय

Jeevan Prabandhan Shivir11 प.पू. अध्यात्मयोगी श्री महेन्द्रसागर जी म.सा. तथा उनके सुशिष्य प.पू. युवामनीषी श्री मनीषसागर जी म.सा. से प्रेरित होकर, उनके बताये मार्ग का अनुसरण जनसामान्य कर सकें, इस उद्देश्य से रायपुर के कुछ युवाओं ने इस संस्था को प्रारंभ करने का उत्तरदायित्व संभाला। यह संस्था मुख्य रूप से जैन धर्म दर्शन के प्रति समर्पित होकर जैन विज्ञान एवं जीवन प्रबंधन विधा से जुड़े शिक्षण एवं शोध कार्यों के प्रति दृढ़ संकल्पित है| किंतु इससे लाभान्वित होने वाले बंधुगण तो जैन तथा जैनेतर सभी होंगे। वर्तमान समाज विशेषकर युवा पीढ़ी जो आध्यात्मिक एवं नैतिक मूल्यों के क्षेत्र में पिछड़ रही है, उन्हें पुनः मूल्य आधारित मार्ग की ओर प्रेरित करना संस्था का मूल उद्देश्य है।

पारंपरिक एवं औपचारिक तरीकों से हटकर तकनीकी साधनों की सहायता से जनसाधारण विशेषकर युवाओं को प्रेरित करने वाले तरीकों से शिक्षा दी जाए, यही संस्था की कार्य पद्धति है। संपूर्ण देश इस संस्था का कार्यक्षेत्र है। अलग-अलग स्थानों पर स्थापित विभिन्न केन्द्रों (centers) के माध्यम से इसकी गतिविधियाँ संचालित की जाएगी।

इसके प्रेरणास्रोत गुरूदेव द्वय का मार्गदर्शन ही संस्था का संबल है। उनकी प्रेरणा तथा अभिलाषा का अनुमोदन करने की भावना से इस संस्था की स्थापना की गई। प.पू. मरूधर ज्योति साध्वीवर्या श्री मणिप्रभा श्रीजी म.सा. का अमूल्य अनुभव इस संस्था की स्थापना के लिये पथ-प्रदर्शक बना है। शाजापुर स्थित प्राच्य विद्यापीठ के निदेशक माननीय डाॅ. सागरमल जी जैन सा. का इस संस्था पर वरदहस्त रहा है। जिनशासन रत्न प्राणिमित्र श्री कुमार पाल भाई की व्यापक दृष्टि एवं गहन चिंतन भी इस संस्था को मूर्त रूप प्रदान करने में सहयोगी बना है। इंदौर के डाॅ. (प्रो) वीरेंद्र जी नाहर एवं श्री रामकृष्ण जी काबरा का भी समर्पित सहयोग एवं उल्लेखनीय योगदान प्राप्त होता रहा है। गुरुदेवश्री के रायपुर प्रवास के दौरान छत्तीसगढ़ तीर्थाधिराज श्री कैवल्यधाम तीर्थ के पुनीत प्रांगण में दिनांक 13 मई 2013, अक्षय तृतीया के दिन इस संस्था की नींव रखी गई।

 

उद्देश्य (Objectives)

व्यक्ति अहिंसा, अनेकांत, अपरिग्रह, समता आदि सिद्धांतों का आलंबन लेकर अपने जीवन के समस्त पक्षों में समन्वय कायम कर सके तथा एक आदर्श व्यक्तित्व के रूप में परिवार समाज एवं देश में स्वयं को स्थापित कर सके, यही इस संस्था का मूल उद्देश्य है। इस हेतु संस्था ऐसे रचनात्मक कार्यक्रम आयोजित कराने हेतु संकल्पित है, जिससे व्यक्ति जीवन का समग्र, संतुलित एवं सुव्यवस्थित विकास कर सके।

वर्तमान गतिविधियाँ (Current Activities)

वर्तमान में संस्था की निम्न गतिविधियाँ जारी हैं:-

प.पू. अध्यात्मयोगी श्री महेन्द्रसागर जी म.सा. के सुशिष्य प.पू. युवामनीषी श्री मनीषसागर जी म.सा. द्वारा लिखित जीवन प्रबंधन के तत्व (The elements of life management) पर आधारित द्विवर्षीय पत्राचार पाठ्यक्रम का संचालन एवं तदनुसार परीक्षा का आयोजन करना।

शिविर, कार्यशाला (Workshop),गोष्ठी (conference) आदि के माध्यम से युवाओं में सही सोच एवं समझ का विकास करना।

पाठ्यक्रम के विषयों पर आधारित गुरुदेव द्वय के प्रवचनों की आॅडिया-विडियो सी.डी., लेख, साहित्य आदि उपलब्ध कराना।

प्रायोगिक विधियों (Practical Methods)  द्वारा जीवन प्रबंधन के मुख्य तत्त्वों की जानकारी देना।

जैन दर्शन में निहित वैज्ञानिक पहलू, प्रबंधकीय पहलू एवं अन्य शोध विषयों पर अधिक से अधिक अनुसंधान कर उन्हें जन-उपयोगी बनाना।

जनजीवन की समस्याओं को वेबसाइट या sms से प्राप्त कर उनका शीघ्रातिशीघ्र समाधान प्रदान करना

E-library के रूप में महत्त्वपूर्ण पुस्तकों का संग्रह करना , जिसे निःशुल्क जन-जन तक पहुँचाया जा सके|

विशेषता (Special Features)

यह संस्था जन-कल्याण (Human Welfare) के लिए समर्पित है, जिसमें आर्थिक लाभ आदि स्वार्थ आधारित मूल्यों का कोई स्थान नहीं है। संस्था की कार्यप्रणाली की निम्न विशेषताएँ होंगी -

यह शिक्षण संस्था जीवन के बाह्य एवं आंतरिक दोनों ही विकास पर बल देगी।

इस संस्था में शारीरिक विकास (Bodily Development), बौद्धिक विकास (Intellectual Development), मानसिक विकास (Mental Development) के साथ-साथ भावात्मक विकास (Emotional Development) का भी उचित शिक्षण दिया जायेगा, जिससे व्यक्ति कठिन से कठिन परिस्थिति में भी आत्म-नियंत्रणपूर्वक समस्याओं का समाधान खोज सके।

संस्था द्वारा सैद्धांतिक एवं प्रायोगिक दोनों ही शिक्षाएँ दी जाएगी, जिससे व्यक्ति के जीवन में निरंतर सकारात्मक परिवर्तन होता रहे और इस परिवर्तन में स्थायित्व भी बना रहे।

नैतिक एवं आध्यात्मिक मूल्यों के प्रति व्यक्ति की रुचि एवं उत्साह बढ़े, इस हेतु विशेष कार्यशालाएँ (Workshop), शिविर, गोष्ठी आदि आयोजित किए जाएंगे।

प्राचीन शास्त्रों में उपलब्ध जीवन विकास के दुर्लभ सूत्रों तथा वर्तमान में प्रचलित मैनेजमेंट सूत्रों का समन्वय कर एक संपूर्ण लाईफ मैनेजमेंट प्रणाली की शिक्षा दी जाएगी, जिससे व्यक्ति अपने जीवन के सभी अंगों को स्वयं मैनेज कर सके।

आगामी योजनाएँ (Forthcoming Plans)

किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से जीवन-प्रबंधन पाठ्यक्रम को मान्य कराना।

गुरुदेव के सान्निध्य में जैन दर्शन एवं आचरण के जानकार लोगों को तैयार करना।

जीवन-प्रबंधन के प्रशिक्षक तैयार करना एवं उनके द्वारा स्थान-स्थान पर कार्यशालाएँ (Workshops) चलाना तथा शिविर आयोजित करना।

शोध एवं विकास विभाग (R & D) को अधिक से अधिक उन्नत करना।