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Param Pujya Adhyatmayogi Mahendrasagar Ji Ma. Sa.

हर बालक जन्म से ही विलक्षण प्रतिभाएं साथ लेकर आता है। उन प्रतिभाओं को विकसित करने के लिए उपयुक्त शिक्षा एवं वातावरण मिलना आवश्यक है। उत्तम शिक्षा का अर्थ यह है कि बालक आनंद से जीना सीखे व उस आनंद को बांटना सीखे। सद्गुणों एवं संस्कारों का विकास किये बिना यह संभव नहीं।

Param Pujya Yuvamanishi Manishsagar Ji Ma. Sa.

मूल्यवान वस्तु के लिये विशेष सुरक्षा व्यवस्था की आवश्यकता होती है, यदि सुरक्षा व्यवस्था में लापरवाही की जाये तो लुटते देर नहीं लगती। सभी सुख एवं समृद्धि का यदि कोई मूल कारण है तो वह एकमात्र संस्कार ही है। समय रहते अगर इसकी सुरक्षा ना की गई तो केवल पछतावा ही रह जायेगा।

Param Pujya Maniprabha Shri Ji Ma.Sa.

आज बच्चे आधुनिक शिक्षा तो प्राप्त कर रहे हैं, परन्तु नैसर्गिक सद्गुणों एवं संस्कारों को खोते जा रहे हैं, जिसके कारण जीवन की गुणवता प्रभावित हो रही हैं। आने वाली पीढ़ी को इतना संस्कार व प्रतिभा समृद्ध बनाना हैं कि विपरीत परिस्थितियों की आंधी उसे डिगा न सके।