साधना आश्रम विभाग की आवासीय नियमावली

विचक्षण जैन विद्यापीठ लोक न्यास है, जिसका एक विभाग है - साधना आश्रम। इस विभाग में जैन धर्म, संस्कृति, परम्परा एवं दर्शन के प्रति आस्थावान महानुभावों को, जिन्हें आगे साधक कहा गया है, यहां रहकर अपनी नियमित आराधना, साधना, स्वाध्याय, प्रतिक्रमण, सामायिक, ध्यान, भक्ति आदि करने हेतु निम्न शर्तो पर आवास की सुविधा उपलब्ध करायी जायेगी:-
(1) साधक निवास में आवास की व्यवस्था के लिये साधकों का वर्गीकरण समय के आधार पर निम्नानुसार किया गया हैः-

  • साधकों का वर्गीकरण
    अतिथि साधक:- किसी भी साधक को सर्वप्रथम अतिथि साधक के रूप में आवास व्यवस्था उपलब्ध करायी जायेगी जो अधिकतम 6 दिनों के लिये होगी।
  • अल्पकालीन साधकः- अतिथि साधक जो साधना के लिये योग्य हैं उन्हें अल्पकालीन साधक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकेगा। अल्पकालीन साधक को आवास व्यवस्था अधिकतम 15 दिनों तक के लिये उपलब्ध करायी जा सकेगी।
  • मध्यमकालीन साधकः- योग्य अल्पकालीन साधकों को मध्यमकालीन साधक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकेगा। मध्यमकालीन साधक को आवास व्यवस्था अधिकतम 16 से 120 दिनों तक के लिये उपलब्ध करायी जा सकेगी।
  • दीर्धकालीन साधकः- योग्य मध्यमकालीन साधकों को दीर्घकालीन साधक के रूप में वर्गीकृत किया जा सकेगा। दीर्घकालीन साधक को आवास व्यवस्था अधिकतम 121 से 180 दिनों तक के लिये उपलब्ध करायी जा सकेगी।

नोट- साधकों का उपर्युक्त वर्गीकरण स्क्रीनिंग कमेटी द्वारा उनकी योग्यता, आचार-विचार, दैनिक व्यवहार एवं साधक की दिनचर्या के निर्वहन के आधार पर किया जायेगा।

(2) सभी साधकों को साधक नियमावली का पालन करना आवश्यक है। उनके आचार-विचार, दैनिक व्यवहार संतोषप्रद नहीं होने पर या साधना के नियमों का पालन नहीं करने पर उन्हें 1 दिन की सूचना देकर आवास को रिक्त कराया जा सकेगा। आवास सुविधा का नवीनीकरण या एक्सटेंशन न करने की स्थिति में तत्काल प्रभाव से आवास खाली करना होगा। अन्यथा संस्था आवास से बेदखल कर सकती है।

(3) साधक, आवास का उपयोग साधना हेतु करेगा, उसमें रहते हुए किसी प्रकार का व्यापार, व्यवसाय नहीं कर सकेगा एवं किसी भी प्रकार का अनैतिक कार्य नहीं करेगा।

(4) साधक का आवास पर कोई विधिक स्वामित्व नहीं होगा। साधक जब साधनास्थल खाली कर उसको छोडकर जाएंगे तब आवास की चाबी संस्था की आफिस में जमा करवायेंगे, जिससे अन्य साधकों को आवास दिया जा सकेगा। आवश्यकता पड़ने पर सामाग्री रखने के लिए क्लॉक रुम व्यवस्था दी जाएगी।

(5) साधकों को आवास एवं भोजन व्यवस्था निःशुल्क उपलब्ध करायी जायेगी। आवश्यकता होने पर इस सुविधा के लिये शुल्क प्रस्तावित करने का अधिकार संस्था को होगा।

(6) साधक, आवास को स्वच्छ एवं ठीक हालत में रखेंगे। उसे किसी भी प्रकार से क्षतिग्रस्त नही करेंगे । क्षतिग्रस्त होने की हालत में साधक क्षतिपूर्ति अदा करने को बाध्य होगा।

(7) चिकित्सा, वाहन, लाण्ड्री एवं अन्य सुविधाओं का व्यय साधकों को स्वयं वहन करना होगा। संस्था सुविधा उपलब्ध कराने में सहयोग कर सकती है।

(8) साधकों द्वारा विशेष उपकरण जैसे फ्रीज़, ए. सी., इण्डक्शन, ओवन आदि का उपयोग नहीं किया जा सकेगा।

(9) साधकों द्वारा मोबाईल का उपयोग वर्जित है। आफिस/साधक निवास में उपलब्ध फोन की सुविधा का उपयोग एक निश्चित समय में करने की अनुमति दी जायेगी।

(10) साधक ट्रस्ट मण्डल की स्वीकृति के बिना किसी अन्य को आवास का कब्जा नहीं देगा एवं अपने साथ भी नहीं रखेगा।

(11) यदि विचक्षण जैन विद्यापीठ में कोई बड़ा धार्मिक कार्यक्रम आयोजित होता है और उस हेतु ट्रस्ट मण्डल को आवास की आवश्यकता होती है तो ट्रस्ट मण्डल दो दिन की पूर्व सूचना पर उसमें रहने वाले साधकों को उसे खाली करने या उसमें दूसरों को साथ रखने के लिए कह सकता हैं और साधकों का यह दायित्व होगा कि वे उस अवधि के लिए सहयोग देवें।

(12) साधक सिर्फ रविवार के दिन अपने स्वजनों-परिजनों से दोपहर 2 से 4 बजे तक ही मिल सकेंगे।

(13) साधक के स्वजनों को मिलने के लिये आने पर साधक द्वारा आवास व्यवस्था हेतु लिखित पूर्व सूचना देनी होगी।

(14) महाराज साहब के दर्शन हेतु आने वाले दर्शनार्थियों को आवास व्यवस्था उपलब्ध होने पर अधिकतम तीन दिन के लिये आवंटित की जा सकती है।

प्रत्येक साधक को साधना आश्रम के अन्य नियम का पूर्ण पालन करना होगा।
जैसे अभक्ष का त्याग, सप्त व्यसन का त्याग, रात्री भोजन का त्याग।

(15) किसी भी विवाद की स्थिति में ट्रस्ट प्रबंधन का निर्णय अंतिम एवं सर्वमान्य होगा।